'अर्नब' साइक्लोन का आंध्र प्रदेश के तटों से टकराना जारी, भारी बारिश और भीषण तूफ़ान
इमेज स्रोत, Getty Images
प्रकाशित 3 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 5 मिनट
मौसम विभाग ने कहा कि बुधवार को आंध्र प्रदेश के तट पर 'अत्यंत भीषण' चक्रवाती तूफ़ान अर्नब के तट से टकराने की प्रक्रिया जारी थी. तूफ़ान का केंद्र अब भी कोस्टललाइन के बेहद क़रीब बना हुआ है.
मौसम विभाग ने कहा कि चक्रवात के उत्तरी हिस्से में मौजूद बादलों और बारिश की घुमावदार पट्टी अब और आगे बढ़कर ज़मीन के ऊपर पर पहुँच गई है. अगले तीन घंटे तक तट से टकराने की प्रक्रिया जारी रहने की आशंका है.
मौसम विभाग ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "अत्यंत भीषण चक्रवाती तूफ़ान अर्नब का केंद्र आंध्र प्रदेश के तट के बेहद क़रीब बना हुआ है और इसके तट से टकराने की प्रक्रिया जारी है."
मौसम विभाग के अनुसार, यह तूफ़ान यानम के दक्षिण में, बापटला और विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश के तट से टकराया. उस समय यह ज़्यादा भीषण चक्रवाती तूफ़ान था और इसकी अधिकतम हवा की रफ़्तार 125-135 किलोमीटर प्रति घंटा थी.
वहीं झोंकों की रफ़्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच रही थी. अधिकारियों ने बताया कि तट से टकराने की प्रक्रिया 28 अक्तूबर को तड़के क़रीब 1.20 बजे शुरू हुई.
उड़ानों पर असर
बुधवार को भीषण चक्रवाती तूफ़ान के आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की आशंका के बीच नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्थिति की समीक्षा करने और उड़ानों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए एक बैठक की.
मंत्रालय ने कहा कि तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के क्षेत्रों से आने-जाने वाली उड़ानों पर सबसे अधिक असर पड़ने की आशंका है.
अर्नब के तट के क़रीब पहुँचने के साथ ही आंध्र प्रदेश के उत्तरी ज़िलों में भारी बारिश हुई. इससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और बड़े पैमाने पर नुक़सान हुआ. वहीं, दक्षिणी ओडिशा में भी लोगों के बीच चिंता बनी हुई है.
छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें
सबसे अधिक पढ़ी गईं
समाप्त
विशाखापत्तनम में सैकड़ों पेड़ उखड़ गए हैं. ग्रेटर विशाखापत्तनम नगर निगम ने मंगलवार शाम छह बजे तक इनमें से 55 पेड़ों को हटाया था. सड़कें खोलने और यातायात बहाल करने के लिए पेड़ों को हटाने वाली 30 टीमें काम कर रही हैं.
नगर निगम के आयुक्त केतन गर्ग ने गजुवाका जाते समय पूर्वी और दक्षिणी ज़ोन के कुछ हिस्सों का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को मौक़े पर मौजूद रहने और गिरे हुए पेड़ों के साथ मलबे को तुरंत हटाने का निर्देश दिया. सफ़ाई कर्मचारियों को रातभर काम करने के लिए कहा गया है.
इमेज स्रोत, Getty Images
कई पेड़ उखड़े और बाढ़ जैसी स्थिति
अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यानम में अब तक 2,000 लोग ही राहत शिविरों में पहुँचे हैं. बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद ज़्यादातर लोग अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं. पुडुचेरी के इस क्षेत्र में, जहां से चक्रवात के तट पार करने की आशंका है, क़रीब 5,000 लोगों के लिए 20 राहत शिविर बनाए गए हैं.
यानम के क्षेत्रीय प्रशासक शिवराज मीणा ने द हिंदू को बताया, "ज़्यादातर लोग राहत शिविरों में जाने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में हमें उन्हें समझाने के लिए एनडीआरएफ़ के कर्मियों और स्थानीय पुलिस को तैनात करना पड़ रहा है."
55,600 से अधिक आबादी वाले यानम में एनडीआरएफ़ के क़रीब 100 जवान तैनात हैं. नुकसान को कम करने के लिए सड़कों के किनारे लगे पेड़ों की छंटाई भी की गई है.
समचाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, काकीनाडा ज़िले में भारी बारिश और समुद्र का पानी भर जाने से बॉम्बे कट्टा इलाक़े के पास बाढ़ के पानी में फँसे चार लोगों को पुलिस ने बचाया. ज़िला पुलिस की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई.
इमेज स्रोत, Getty Images
ये चारों लोग सुबह ड्यूटी पर पहुँचे थे, लेकिन रात तक वहीं फँसे रहे. बाढ़ के पानी ने उस जगह को पूरी तरह घेर लिया था, जहाँ वे ठहरे हुए थे. इस वजह से उनके बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था. उन्होंने पुलिस को अपनी स्थिति की जानकारी दी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया.
विज्ञप्ति के अनुसार, पुलिस ने चारों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, उन्हें एक वाहन में बैठाया और उनके घर भेज दिया.
इस बीच, चक्रवात अर्नब के कारण काकीनाडा एंकरिज पोर्ट स्थित सीडब्ल्यूसी के गोदामों में तीन लोगों के फँसे होने की ख़बर मिली. भारी बारिश और समुद्र का पानी परिसर में घुसने से वहाँ बाढ़ जैसी स्थिति बन गई थी. इसके अलावा, बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई थी.
स्थिति तब गंभीर हो गई, जब रात की शिफ्ट में काम करने वाले कर्मचारी गोदाम परिसर से बाहर नहीं निकल सके. बाढ़ के पानी ने पूरे इलाक़े को घेर लिया था.
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि जब तक बेहद ज़रूरी न हो, वे घरों से बाहर न निकलें और बाढ़ के पानी से भरे इलाक़ों से दूर रहें.
इमेज स्रोत, Getty Images
इस साइक्लोन का नाम अर्नब कैसे पड़ा?
चक्रवात अपने नाम 'अर्नब' को लेकर भी चर्चा में है. इसके नामकरण की प्रक्रिया और इसके पीछे की वजह लोगों का ध्यान खींच रही है.
इस चक्रवात का नाम बांग्लादेश ने प्रस्तावित किया था. यह बंगाली शब्द है, जिसका अर्थ 'महासागर' या 'समुद्र' होता है. यह नाम उत्तर हिंद महासागर में आने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नामकरण की व्यवस्था का हिस्सा है.
उत्तर हिंद महासागर के चक्रवातों के नामों की सूची में 52 नाम शामिल हैं. ये नाम 13 देशों- बांग्लादेश, भारत, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन ने दिए हैं. इस सूची को अप्रैल 2020 में अपनाया गया था.
बंगाल की खाड़ी दुनिया के उन प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, जहाँ उष्णकटिबंधीय चक्रवात आते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें
BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह
कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.
Source: BBC Hindi · BBC News हिंदी
At a glance
- Topic
- World
- Country
- 🇮🇳 IN
- Publisher language
- HI
- Added to Allnira