फ़िल्म 'रामायण' में सीता के किरदार के लिए साई पल्लवी के चुने जाने पर क्यों छिड़ी बहस?

फ़िल्म 'रामायण' के प्रोमोशन से जुड़े एक कार्यक्रम में साई पल्लवी

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इमेज कैप्शन, फ़िल्म 'रामायण' के प्रोमोशन से जुड़े एक कार्यक्रम में साई पल्लवी
    • Author, नंदिनी वेल्लास्वामी
    • पदनाम, बीबीसी तमिल
  • प्रकाशित एक मिनट पहले

  • पढ़ने का समय: 8 मिनट

नितेश तिवारी की आने वाली फ़िल्म 'रामायण' दिवाली के मौक़े पर रिलीज़ होने वाली है. फ़िल्म की घोषणा के बाद से ही इसकी कास्ट और बजट समेत कई मुद्दों पर लगातार बहस हो रही है.

फ़िल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, यश रावण और साई पल्लवी सीता की मुख्य भूमिका में हैं.

फ़िल्म में सीता के किरदार के लिए साई पल्लवी को लिए जाने की आलोचना की है. एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कई यूज़र्स इस पर सवाल उठा रहे हैं.

कुछ लोगों ने टिप्पणी की थी कि साई पल्लवी सीता की भूमिका के लिए सही चॉइस नहीं हैं. कुछ लोगों का कहना है कि रामायण पर आधारित धारावाहिकों और फ़िल्मों में अभिनय कर चुकी अभिनेत्रियां इस भूमिका के लिए ज़्यादा उपयुक्त होतीं.

इन आलोचनाओं के बीच साई पल्लवी की पिछली फ़िल्मों, उनकी ख़ूबसूरती और मेकअप के इस्तेमाल को लेकर उनके विचारों समेत कई दूसरी बातें एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं.

साई पल्लवी को लेकर चल रहे विवाद पर बात करने से पहले आइए, उनके बारे में जानते हैं.

साई पल्लवी चेहरे पर मुंहासों के साथ पर्दे पर आईं

फ़िल्म रामायण में राम की भूमिका रणबीर कपूर और सीता की भूमिका में साई पल्लवी

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इमेज कैप्शन, फ़िल्म रामायण में राम की भूमिका रणबीर कपूर और सीता की भूमिका में साई पल्लवी

साई पल्लवी अपनी अनूठी भूमिकाओं और फ़िल्मों में बहुत कम या बिल्कुल मेकअप नहीं करने के लिए जानी जाती हैं.

साई पल्लवी का जन्म और पालन-पोषण तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुआ. उन्होंने जॉर्जिया में मेडिकल की पढ़ाई की. उनके पिता पड़ुकर जनजाति से हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता पड़ुकर भाषा बोलते हैं, जबकि उनकी मां तमिल बोलती हैं.

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उन्होंने यह भी कहा है कि कई लोग ग़लती से उन्हें मलयाली समझ लेते हैं.

साल 2008 में एक निजी तमिल टेलीविज़न चैनल पर प्रसारित होने वाले डांस शो में हिस्सा लेकर उन्होंने लोगों का ध्यान खींचा. उन्होंने तेलुगु के एक डांस शो में भी हिस्सा लिया. फ़िल्म इंडस्ट्री में उनके आने की मुख्य वजह डांस ही था. कई इंटरव्यू में वह डांस के प्रति अपने जुनून के बारे में बता चुकी हैं.

आज भी कई फ़िल्मों में उनके डांस की चर्चा होती है. ख़ास तौर पर फ़िल्म 'मारी 2' में धनुष के साथ उनका गाना 'राउडी बेबी' उनके डांस कौशल को दिखाता है. इसी तरह, तेलुगु फ़िल्म 'श्याम सिंघा रॉय' में देवदासी की भूमिका निभाने वाली साई पल्लवी के ज़्यादातर दृश्यों में डांस सीक्वेंस थे.

यह देखा जा सकता है कि साई पल्लवी न सिर्फ़ डांस, बल्कि अपने किरदारों के चुनाव में भी आम तौर पर बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल करने वाली फ़िल्मों के चलन से काफ़ी अलग रहती हैं.

कुछ फ़िल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाने के बाद 2015 में मलयालम में रिलीज़ हुई अल्फ़ोंस पुथ्रेन की फ़िल्म 'प्रेमम' साई पल्लवी की पहली बड़ी फ़िल्म थी. चेहरे पर मुंहासों और बिना मेकअप के पर्दे पर आईं साई पल्लवी ने इस फ़िल्म में 'मलर' की भूमिका निभाकर काफ़ी लोकप्रियता हासिल की.

बाद में एक इंटरव्यू में साई पल्लवी ने बताया कि यह फ़िल्म चेन्नई में क़रीब 300 दिनों तक चली थी. पत्रकार बरखा दत्त के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था, "जब 'प्रेमम' रिलीज़ हुई, तो मुझे डर था कि लोग मेरी आलोचना करेंगे क्योंकि मैं सिमरन और तृषा जैसी नहीं दिखती थी. लेकिन मैं ख़ुश हूं कि लोगों ने मुझे वैसे ही स्वीकार किया, जैसी मैं हूं. चूंकि यह मलयालम फ़िल्म थी, इसलिए लोगों ने कहा कि मेरे बाल और चेहरा ही काफ़ी हैं."

फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद से साई पल्लवी कई इंटरव्यू में बिना मेकअप या बहुत कम मेकअप के साथ अभिनय करने के बारे में विस्तार से बात कर चुकी हैं.

मेकअप से गुरेज़ क्यों?

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इमेज कैप्शन, फ़िल्म प्रेमम का पोस्टर

साल 2022 में एक ऑनलाइन चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "जब लोग मुझसे मेरे मेकअप के बारे में पूछते हैं, तो मुझे समझ नहीं आता कि क्या कहूं. मैं एक आम लड़की हूं. मेरे चेहरे पर मुंहासे हैं. मेरे भी अपने कई तरह के डर हैं."

"फ़िल्म 'प्रेमम' के बाद कुछ निर्देशकों ने मुझसे थोड़ा मेकअप करने को कहा. लेकिन जब मैंने मेकअप के साथ अभिनय किया, तो उन्होंने कहा कि साफ़ पता चल रहा है कि मैंने मेकअप नहीं किया है. ख़ास तौर पर, जब मुझे ग़ुस्सा आता है, तो मेरे गाल लाल हो जाते हैं, जो उन्हें पसंद था. हम किसी की बाहरी शक्ल-सूरत के आधार पर ख़ूबसूरती को परिभाषित नहीं कर सकते. किसी व्यक्ति की अंदरूनी ख़ूबसूरती अहम होती है."

साई पल्लवी आज भी ज़्यादातर सिर्फ़ आईलाइनर लगाना पसंद करती हैं, क्योंकि उनके मुताबिक़ इससे उनकी "आंखें बड़ी दिखती हैं."

उन्होंने बताया था कि फ़िल्म 'विराट पर्वम' में उन्होंने आईलाइनर तक नहीं लगाया था और सिर्फ़ चेहरा धोकर अभिनय किया था. उन्होंने कहा था, "इससे मुझे काफ़ी आज़ादी मिली."

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, "मुझे अपनी पहली फ़िल्म ('प्रेमम') के बाद ही एहसास हुआ कि बात ख़ूबसूरती या मेरे कपड़े पहनने की नहीं, बल्कि किरदार की है. दर्शकों पर सबसे ज़्यादा असर उसी का पड़ता है."

किरदारों का चुनाव

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इमेज कैप्शन, साई पल्लवी मेकअप के विरुद्ध भी कई बार बात कर चुकी हैं

साई पल्लवी ने कभी-कभी आकर्षक दिखने वाली भूमिकाएं नहीं निभाने के बारे में भी अपनी राय रखी है.

इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में साई पल्लवी ने कहा था, "मुझे नहीं पता कि मैं ख़ुद को किसी असहज स्थिति में डालूंगी या नहीं."

कार्यक्रम की मेज़बान उनसे यह भी पूछती हैं कि क्या वह अभिनेत्री श्रीदेवी की ज़िंदगी पर आधारित फ़िल्म में अभिनय करने का मौक़ा ठुकरा देंगी, अगर इसके लिए उन्हें आकर्षक कपड़े पहनने पड़ें.

इसके जवाब में उन्होंने कहा था, "मुझे नहीं पता कि मैं इस प्रस्ताव को ठुकराऊंगी या नहीं. लेकिन श्रीदेवी अपनी शालीनता और अभिनय के लिए जानी जाती हैं. ऐसे में मुझे किरदार के लिए कपड़े चुनने की आज़ादी होगी."

साई पल्लवी ने कभी-कभी कॉस्मेटिक्स को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी की हैं.

उन्होंने कहा था, "फ़िल्म इंडस्ट्री में आने से पहले कई लोग सिर्फ़ मेरे मुंहासों के बारे में बात करते थे. मेरी बहन अपना रंग निखारने के लिए ऐसे फल और सब्ज़ियां खाती थी, जो उसे पसंद नहीं थीं. अपने रंग के लिए इतनी मेहनत क्यों करनी? सेहत के लिए खाना अच्छा है. लेकिन अगर वह अपना रंग निखारने के लिए ऐसी चीज़ें भी करती है, जो उसे पसंद नहीं हैं, तो इसका असर उसके मन पर पड़ा है. मैंने सोचा कि मुझे उसका साथ देना चाहिए. फ़िल्म 'प्रेमम' के बाद ही लोगों ने मुझे वैसे स्वीकार किया, जैसी मैं हूं. इसी से मुझे सहज महसूस होता है. यह मेरी निजी पसंद है."

साई पल्लवी ने 'गार्गी' और 'श्याम सिंघा रॉय' जैसी मुख्य रूप से महिला-केंद्रित फ़िल्मों में काम किया है. हालांकि, उन्होंने बड़े पैमाने पर लोकप्रियता हासिल करने वाली फ़िल्मों में भी ध्यान खींचा है.

उन्होंने 'मारी 2', 'श्याम सिंघा रॉय', 'एनजीके', 'अमरन' और अब 'रामायण' जैसी फ़िल्मों में भी अभिनय किया है.

उनके अभिनय की जिन भूमिकाओं ने ध्यान खींचा है, उनमें 'गार्गी' में उनका किरदार भी शामिल है. इस फ़िल्म में उन्हें पता चलता है कि उनके पिता ने एक लड़की का यौन शोषण किया है, जिसके बाद वह जो फ़ैसले लेती हैं, वे अहम हैं.

सीता का किरदार

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इमेज कैप्शन, नमित मल्होत्रा, रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और नितेश तिवारी एक कार्यक्रम के दौरान

एक अन्य इंटरव्यू में अपने अभिनय और किरदारों के बारे में बात करते हुए साई पल्लवी ने कहा था, "मैं ज़्यादातर बिना तैयारी के एक्टिंग करना पसंद करती हूं. मेरा अभिनय इस बात पर निर्भर करता है कि मेरे सामने के कलाकार किस तरह के हाव-भाव देते हैं."

साई पल्लवी ने ख़ुद को एक ऐसी शर्मीली इंसान के रूप में पेश किया है, जो चुप रहना पसंद करती हैं और बहुत ज़्यादा बात करना पसंद नहीं करतीं.

साई पल्लवी ने कुछ कार्यक्रमों में सीता की अपनी मौजूदा भूमिका के बारे में भी बात की है.

फ़िल्म से जुड़े एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, "हर अभिनेता को ऐसे किरदार निभाने का मौक़ा नहीं मिलता. किसी भगवान का किरदार निभाना आसान नहीं है, क्योंकि यह इतिहास का हिस्सा बन जाएगा. मैं ख़ुद को ख़ुशक़िस्मत मानती हूं कि मुझे यह किरदार निभाने का मौक़ा मिला. मैं अपने विचारों के मामले में जितना हो सके, उतना पवित्र रहने की कोशिश करती हूं."

अमिताभ बच्चन के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था, "मैंने दूसरी फ़िल्मों में उस किरदार में ढलने के बारे में काफ़ी सोचा है. लेकिन इस किरदार से मुझे क्या हासिल होगा, इस बारे में भी मैंने सोचा."

लेखिका दीपा जानकीरमन ने सिनेमा पर कई किताबें लिखी हैं, जिनमें 'स्टोरी एंड स्क्रीनप्ले' और 'लाइट डिज़ाइनर्स' शामिल हैं.

लेखिका दीपा जानकीरमन ने कहा, "सीता एक पौराणिक किरदार हैं. आप यह नहीं कह सकते कि वह ऐसी हैं या उन्हें ऐसा ही होना चाहिए. आप हर किसी को संतुष्ट नहीं कर सकते. राम की भूमिका निभाने वालों को कभी कोई समस्या नहीं हुई. समस्याएं हमेशा सीता की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्रियों के साथ ही होती हैं. हमें सिर्फ़ यह देखना चाहिए कि संबंधित अभिनेत्री ने वह भूमिका अच्छी तरह निभाई है या नहीं."

दीपा ने यह भी कहा कि साई पल्लवी एक बेहतरीन अभिनेत्री हैं और अपनी भूमिकाएं अच्छी तरह निभा सकती हैं. उन्होंने कहा कि साई पल्लवी ने भारत में एक अच्छी अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान बनाई है.

मनोरंजन जगत के वरिष्ठ पत्रकार और समीक्षक रोहित गिलनानी ने कहा, "मैं साई पल्लवी को सीता के रूप में देखने के लिए वाक़ई उत्सुक हूं. फ़िल्म की आलोचना या प्रशंसा उसे देखने के बाद ही की जानी चाहिए. कोई मशहूर हस्ती हो या आम इंसान, किसी की शारीरिक बनावट का मज़ाक उड़ाना कभी स्वीकार्य नहीं है."

उन्होंने कहा, "साई पल्लवी प्रतिभाशाली अभिनेत्री हैं. मेरा मानना है कि उनके अभिनय के आधार पर उनका आकलन किया जाना चाहिए और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का उचित मौक़ा मिलना चाहिए."

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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Source: BBC Hindi · नंदिनी वेल्लास्वामी

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