समंदर से भटकी ये शार्क नहर में अटकी, लाखों लोग हुए दीवाने, लेकिन अब कहां गई?

शार्क

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इमेज कैप्शन, एक उथली, कंक्रीट की नहर में इतनी बड़ी शार्क पहले कभी नहीं मिली थी
    • Author, जेक क्वोन
    • पदनाम, सियोल संवाददाता
    • ........से, बुसान, दक्षिण कोरिया
  • प्रकाशित एक मिनट पहले

  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

जैसे ही दक्षिण कोरिया के दक्षिण-पूर्वी छोर पर बसे तटीय शहर और व्यस्त शिपिंग हब बुसान की एक नहर में बड़ी शार्क देखी गई, उसे बचाने के लिए समुद्री जीवविज्ञानी किम ह्यून-वू को बुलाया गया.

उन्हें सितंबर के बीच में यह फ़ोन आया था. उस समय वह एक कारोबारी दौरे से घर लौट रहे थे. वह मछली पकड़ने वाली नौकाओं की मदद के लिए मैकेरल मछलियों के झुंडों का पता लगा रहे थे. वह देश के प्रमुख शार्क विशेषज्ञों में से एक हैं. लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कोस्टगार्ड उन्हें किसी शार्क को बचाने के लिए बुलाएगा.

दक्षिण कोरिया में शार्क कोई अनजानी चीज़ नहीं हैं. लेकिन दुनिया के सातवें सबसे व्यस्त बंदरगाह के ठीक पास एक उथली, कंक्रीट की नहर में इतनी बड़ी शार्क पहले कभी नहीं मिली थी.

इसके बाद उसे देखने के लिए समुद्र किनारे लोगों की भीड़ जुटने लगी थी. इसलिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ फ़िशरीज़ साइंस की किम की टीम को तेज़ी से काम करना पड़ा.

सबसे पहला काम यह पता लगाना था कि शार्क किस प्रजाति की है.

कुछ शार्क दूसरी शार्कों के मुक़ाबले ज़्यादा ख़तरनाक होती हैं. 1975 की मशहूर फ़िल्म 'जॉज़' में दिखाई गई ग्रेट व्हाइट शार्क इंसानों पर हमला करने और उन्हें मारने के लिए जानी जाती है.

बुसान में मिली शार्क मादा डस्की शार्क थी. इस प्रजाति की शार्क ने इंसानों पर अब तक सिर्फ़ दो जानलेवा हमले किए हैं. फिर भी किम को डर था कि भीड़ में से कोई नहर में कूद सकता है या गिर सकता है.

शार्क को वापस समुद्र में पहुंचाना ज़रूरी था.

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दक्षिण कोरिया के बुसान में उत्तरी बंदरगाह पर 21 अक्टूबर, 2026 को नहर से बाहर निकालने के अभियान के दौरान "बुकांगी" नाम की एक शार्क नहर में तैर रही है, जिसे आगंतुक देख रहे हैं.

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इमेज कैप्शन, इस गहरे रंग की शार्क को सबसे पहले सितंबर के मध्य में नहर में देखा गया था

कोस्टगार्ड की एक छोटी नाव ने इलेक्ट्रिकल डिटरेंस डिवाइस की मदद से शुरुआती कोशिश की. यह डिवाइस हल्का करंट पैदा करती है, जिससे शार्क दूर रहती हैं.

इन डिवाइस का इस्तेमाल आमतौर पर लोकप्रिय समुद्र तटों के पास शार्क देखे जाने के बाद किया जाता है. लेकिन पांच घंटे बाद अधिकारियों ने तय किया कि यह शार्क इस डिवाइस के लिए बहुत बड़ी और तेज़ है.

किम ने अपना तरीका बदला. उन्होंने तय किया कि शार्क के ख़ुद नहर से बाहर निकलने का इंतज़ार किया जाए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

अधिकारी उसे नहर से बाहर निकालने के तरीक़े तलाश रहे थे. इसी दौरान फंसी हुई यह शार्क वायरल हो गई.

उसके दिखाई देने के कुछ ही घंटों बाद स्थानीय प्रशासन ने शहर के सभी लोगों को आपातकालीन टेक्स्ट अलर्ट भेजा. इसमें पैदल चलने वालों और स्थानीय लोगों से "अपनी सुरक्षा के लिए सावधानी बरतने" की अपील की गई.

आमतौर पर लोग नहर के किनारे बने पार्क में कम ही जाते थे. लेकिन इस संदेश के बाद वहां शार्क को देखने के लिए उत्सुक लोगों की भीड़ उमड़ने लगी.

उसके मुरीदों ने उसका नाम बुकंगी रख दिया. यह नाम पास के बंदरगाह के कोरियाई नाम "बुक हांग" से लिया गया था. कुछ ही दिनों में एक कंपनी ने इस नाम का ट्रेडमार्क करा लिया. इसके बाद बुकंगी के बैज, सॉफ्ट टॉय और टी-शर्ट ऑनलाइन बिकने लगे.

शहर के अधिकारियों ने भी इसमें हिस्सा लिया. उन्होंने शार्क का लाइवस्ट्रीम शुरू कर दिया और उसे अपना आधिकारिक शुभंकर बना दिया.

नहर के प्रवेश द्वार पर एक बैनर लगाया गया. इसमें लोगों से "बुकंगी की ओर से" एक याचिका पर हस्ताक्षर करने को कहा गया. इसका मक़सद राष्ट्रीय सरकार से नहर के किनारे 30,000 दर्शकों की क्षमता वाला नया बेसबॉल स्टेडियम बनाने के लिए समर्थन की मांग करना था.

स्थानीय लोगों और बाहर से आए लोगों के बीच शार्क को देखने का काम एक टीम की तरह हो गया. बिना कहे ही एक नियम बन गया था कि बच्चों को सबसे आगे जगह दी जाएगी. और जो भी बुकंगी को देखता, वह नए आए लोगों को उसकी तरफ़ इशारा करके दिखाता.

कुछ लोगों ने ख़ुद को बुकंगी का रक्षक भी बना लिया. वे रात में नहर के किनारे गश्त करते थे, ताकि कोई बुकंगी पर टॉर्च या लेज़र न डाले.

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इमेज कैप्शन, एक पोस्टर में "बुकंगी की ओर से" बेसबॉल स्टेडियम के लिए समर्थन जुटाने का आह्वान किया गया है

आख़िरकार 16 लाख से ज़्यादा लोग नहर पर उमड़ पड़े.

स्थानीय मेयर ने कहा कि इस शार्क की वजह से बंदरगाह को "ऐसा प्रचार मिला है, जिसे अरबों डॉलर खर्च करके भी नहीं खरीदा जा सकता."

शार्क को देखने अपनी दो भतीजियों के साथ आईं किम जू-उन ने कहा, "इन दिनों लोगों का इस तरह एक साथ आना बहुत दुर्लभ है. मुझे लगता है कि बुकंगी ने हम सभी को एक साथ ला दिया है. हम उसके लिए उत्साहित हो रहे हैं... यह बहुत मज़ेदार है."

लेकिन अधिकारी बुकंगी को नहर में नहीं छोड़ सकते थे.

सितंबर का महीना ख़त्म होने को था और बुकंगी को कई दिनों से खाते हुए नहीं देखा गया था. उसके थूथन पर खून से सने घाव भी दिखाई दिए थे. ये घाव कंक्रीट की दीवारों से टकराने की वजह से हुए थे.

समुद्री जीवविज्ञान के जाने-माने प्रोफ़ेसर चोई यून ने स्थानीय मीडिया से कहा कि विशेषज्ञ ख़ास तौर पर शार्क की आंख के आसपास लगी "गंभीर" चोट को लेकर चिंतित थे.

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इमेज कैप्शन, किम जू-यून और उनकी भतीजियाँ बुकंगी को देखने पहुंचीं

सितंबर के अंत में किम की टीम ने बुकंगी को बचाने की एक और कोशिश की. समुद्री जीव विज्ञानी ने 2004 में मैसाचुसेट्स में हुई एक घटना को ध्यान में रखा. उस समय पानी की तेज़ धार का इस्तेमाल करके एक ग्रेट व्हाइट शार्क को उथले तालाब से बाहर निकाला गया था.

लेकिन जब टीम ने बुकंगी के साथ यही तरीका आज़माया, तो वह बार-बार वापस आ जाती थी.

2 अक्तूबर को उन्होंने नहर की पूरी चौड़ाई में एक जाल लगाने का फ़ैसला किया, ताकि बुकंगी वापस न आ सके. लेकिन वह जाल के चारों ओर से तैरकर निकल गई और कुछ ही घंटों में वापस आ गई.

इस समय तक किम को लगने लगा था कि शायद शार्क के थूथन में मौजूद इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सेंसर में कोई समस्या है. शार्क इन सेंसर का इस्तेमाल रास्ता खोजने के लिए करती हैं. या फिर बंदरगाह में जहाज़ों से निकलने वाली तेज़ आवाज़ों की वजह से वह भ्रमित हो गई हो.

समुद्र मंत्रालय का कहना है कि बुकंगी का नहर में पहुंचना समुद्र के बढ़ते तापमान का संकेत हो सकता है.

मंत्रालय का मानना है कि वह बड़ी संख्या में मौजूद मछलियों का पीछा करते हुए गर्म पानी वाले इलाक़े में पहुंची होगी. इस साल की पहली छमाही में दक्षिण कोरिया के पूर्वी तट के पास करीब 50 बड़ी शार्क दर्ज की गईं. यह संख्या पिछले साल के मुक़ाबले चार गुना ज़्यादा है.

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इमेज कैप्शन, बुसान बंदरगाह तक जाने वाली नहर, जहाँ बुकंगी फँस गई थी.

हर नाकाम कोशिश के साथ बुकंगी के कुछ नए प्रशंसक मांग करने लगे कि उसे वहीं शांति से रहने दिया जाए.

गुरुवार को उनमें से कई लोग तख़्तियां लेकर वहां पहुंचे और "बुकंगी को अकेला छोड़ दो" और "जाल हटाओ" के नारे लगाए.

जब एक सुरक्षा गार्ड ने उन्हें रुकने के लिए कहा, तो एक व्यक्ति चिल्लाया, "मैं तुमसे प्यार करता हूं, बुकंगी!"

चालीस की उम्र की जियोंग यो-वॉन ने कहा, "मैं उसके लिए दीवानी हूं." उन्होंने शार्क को "उम्मीद और ख़ुशी का स्रोत" बताया और कहा, "मुझे नहीं लगता कि हमें उसे इस तरह बेरहमी से यहां से निकाल देना चाहिए."

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इमेज कैप्शन, बुकंगी के "बेदखली" के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग

कुछ दूसरे लोगों को लगा कि अब उसके घर लौटने का समय आ गया है.

एक महिला ने तीसरी कोशिश में शार्क को देखने के बाद कहा, "मैं उसे घंटों देखती रहती, क्योंकि मैं उससे इतनी प्रभावित थी. मैं चाहती हूं कि बुकंगी यहीं रहे, लेकिन मैं चाहती हूं कि वह लंबी और स्वस्थ ज़िंदगी जिए."

शिन सेउंगमिन ने कहा, लोग मज़ाक में कहते थे कि नगर परिषद को "बुकंगी का आधिकारिक पहचान पत्र बनाना चाहिए और उसे पेंशन देनी चाहिए."

उन्होंने कहा, "वह अपने साथ इतनी ख़ुशी लेकर आई. लेकिन अब उसे जाकर अपनी सामान्य शार्क वाली ज़िंदगी जीनी चाहिए."

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इमेज कैप्शन, बुकंगी बुसान के लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय हो चुकी है

किम बताते हैं कि नहर में रहना बुकंगी के लिए गंभीर ख़तरा बन सकता है, क्योंकि शरद ऋतु में तापमान गिर रहा है. आमतौर पर इस वजह से शार्क दक्षिण की ओर गर्म पानी वाले इलाक़ों में चली जाती हैं.

उन्होंने कहा, "यह नहर ऐसी जगह से बहुत दूर है, जिसे हम उसका प्राकृतिक ठिकाना कह सकें. कोई जंगली जानवर ऐसी जगह नहीं रह सकता, जो पूरी तरह इंसानों के लिए बनाई गई हो."

आख़िरकार, जब लोगों का ध्यान इस मामले पर और बढ़ गया, तो समुद्र मंत्रालय ने मत्स्य विज्ञान संस्थान से बचाव अभियान की ज़िम्मेदारी अपने हाथ में ले ली. करीब 40 लोगों को अभियान में लगाया गया. इनमें बुसान के एक्वेरियम के गोताख़ोर भी शामिल थे. एक पशु चिकित्सक को भी तैयार रखा गया था. अगर बुकंगी गोताख़ोरों पर हमला करती, तो एंबुलेंस भी तैयार थी.

बुधवार को गोताख़ोरों ने जाल की दो परतें लगाईं. बुकंगी को सफलतापूर्वक संकरी नहर से निकालकर खुले पानी में पहुंचा दिया गया. लेकिन रात में वह बाहरी जाल के नीचे से तैरकर वापस नहर में आ गई.

इससे वह दोनों जालों के बीच फंस गई.

फिर गुरुवार को बचावकर्मियों ने बाहरी जाल हटा दिया. इसके बाद बुकंगी को खुले समुद्र की ओर लगातार आगे बढ़ते हुए देखा गया.

हालांकि वह कभी-कभी वापस नहर की ओर भी आती थी, लेकिन बचाव अभियान ख़त्म हो चुका था.

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इमेज कैप्शन, समुद्री जीवविज्ञानी किम ह्यून-वू का कहना है कि बुकंगी के लिए नहर में रहना खतरनाक है.

पिछले कुछ दिनों में बुकंगी को किसी ने नहीं देखा है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक अच्छा संकेत है.

प्रोफ़ेसर चोई का मानना है कि बुकंगी शायद ज़्यादा खुले और गहरे पानी के हिसाब से ख़ुद को ढाल रही है.

उन्होंने कहा कि उसके बहुत दूर तक जाने की संभावना नहीं है और वह आने वाले हफ़्ते में फिर दिखाई दे सकती है.

लेकिन उन्हें बुकंगी को लगी किसी भी चोट को लेकर भी चिंता है. उन्होंने स्थानीय मीडिया से कहा कि नहर में फंसे रहने के दौरान वह "दीवारों से बार-बार रगड़ती रही, जिससे उसके थूथन और यहां तक कि उसके पेक्टोरल फ़िन्स की त्वचा भी निकल गई."

फ़िलहाल, दक्षिण कोरिया बुकंगी के लिए उम्मीद लगाए बैठा है. उम्मीद है कि वह अपना घर, यानी खुले समुद्र तक वापस पहुंचने का रास्ता खोज लेगी.

सियोल में लीह्यून चोई की अतिरिक्त रिपोर्टिंग

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Source: BBC Hindi · जेक क्वोन

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