फ़्रिज से फ़ैक्टरी तक: इंटरनेट से जुड़े डिवाइस कैसे बन सकते हैं हैकर्स का निशाना?
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- Author, शियोना मैक्कलम
- पदनाम, सीनियर टेक रिपोर्टर
प्रकाशित 2 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 5 मिनट
हाल ही में पूरे यूरोप के सुपरमार्केट पर हुए एक संदिग्ध साइबर अटैक में फ्रिज और बड़े फ़्रीज़र हैक हो गए.
इंटरनेट और वाई-फ़ाई से जुड़े उपकरणों में फ्रिज, वॉशिंग मशीन और सेंट्रल हीटिंग सिस्टम भी शामिल हैं.
जब साधारण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी साइबर हमलों से सुरक्षित नहीं हैं, तो इससे पूरी इंडस्ट्री की कमज़ोरियाँ उजागर होती हैं.
जो डिवाइस इंटरनेट से जुड़े होते हैं, उन्हें दूर से कंट्रोल करना आसान होता है. कई बार हैकर्स इसका फ़ायदा उठा लेते हैं.
लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हैकर्स हर डिवाइस को कंट्रोल कर सकते हैं. घरेलू उपकरण बनाने वाले ब्रांड लगातार दावा करते हैं कि उनकी तकनीक सुरक्षित है.
कुछ डिवाइस पर पहले भी ऐसे अटैक हो चुके हैं. एक रिसर्च में दावा किया गया है कि 2015 में सैमसंग का एक स्मार्ट फ्रिज हैकर्स के कंट्रोल में आ गया था.
लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि सुपरमार्केट पर हुए साइबर अटैक का घरेलू उपकरणों से कोई सीधा संबंध है.
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ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) के पूर्व मुख्य कार्यकारी सियारन मार्टिन ने बीबीसी से कहा, "निर्माताओं को कनेक्टेड डिवाइस को सुरक्षित बनाने के लिए और ज़्यादा काम करना होगा. हमें बड़ी टेक कंपनियों से और उम्मीद करनी चाहिए, ताकि वे हमें पहले से ज़्यादा सुरक्षित डिवाइस और प्रोडक्ट दें."
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उन्होंने कहा, "आम उपभोक्ताओं को अपने डिवाइस अपडेट रखने चाहिए. जहाँ तक हो सके, टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन भी चालू रखना चाहिए. इसे अपडेट करने में कुछ सेकेंड ही लगते हैं."
अप्रैल 2024 से ब्रिटेन के क़ानून के मुताबिक़, घरेलू स्मार्ट डिवाइस बनाने वाली कंपनियों को न्यूनतम साइबर सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा. इनमें पासवर्ड और सुरक्षा अपडेट से जुड़ी ज़रूरतें भी शामिल हैं.
एनसीएससी ने कहा कि वह सुपरमार्केट से जुड़ी इन घटनाओं को समझने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और इंडस्ट्री के साथ काम कर रहा है, लेकिन उसे ब्रिटेन पर इनके किसी असर की जानकारी नहीं है.
फिर भी, ब्रिटेन की साइबर डिफ़ेंस से जुड़े शोधकर्ताओं ने यूके के रिटेलर्स से जुड़े ऐसे 800 से ज़्यादा रेफ़्रिजरेशन और बिल्डिंग-कंट्रोल इंटरफ़ेस या स्मार्ट ऑटोमेशन सिस्टम की पहचान की है, जिन्हें बाहरी इंटरनेट के ज़रिए कंट्रोल किया जा सकता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें हैक किया जा सकता है. लेकिन वे उन हैकर्स के निशाने पर आ सकते हैं, जो कमज़ोर पासवर्ड या सॉफ़्टवेयर की कमियों का फ़ायदा उठाते हैं.
कारें, पावर प्लांट और वाटर सप्लाई पर भी सवाल
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हालांकि, सुपरमार्केट पर पहले हुए हमलों के बाद ही सरकार ने बड़े फ़ूड रिटेलर्स से अपनी साइबर सुरक्षा मज़बूत करने को कहा था.
ब्रिटिश रिटेल कंसोर्शियम की मुख्य कार्यकारी हेलेन डिकिंसन ने बीबीसी न्यूज़ से कहा, "ऐसी साइबर घटनाएँ रिटेलर्स के लिए बड़ी चिंता का विषय हैं."
उनके मुताबिक़, कारोबारी एनसीएससी के साथ मिलकर जानकारी साझा करने और अपनी सुरक्षा मज़बूत करने पर काम कर रहे हैं.
हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. हैकिंग की वजह से पहले भी फ़ूड सप्लाई प्रभावित हुई है और इसे लेकर चिंता जताई गई है.
मई 2025 में ब्रिटेन के सुपरमार्केट 'एम एंड एस' और रिटेल कंपनी 'को-ऑप' को हैकरों ने निशाना बनाया था. उस समय रिटेलर्स को ताज़ा सामान पहुँचाने में दिक़्क़त हुई थी. साइबर हमले के बाद पूरे दिन ग्राहकों ने स्टोर में सामान उपलब्ध नहीं होने की शिकायत की थी.
साइबर सुरक्षा फ़र्म सेंटिनलवन के शोधकर्ता टॉम हेगेल ने बीबीसी न्यूज़ से कहा कि फ़ूड रिटेलर्स को साइबर सुरक्षा के मामले में ज़्यादा सतर्क रहना चाहिए.
उन्होंने कहा, "रिटेलर्स को इस सवाल का जवाब देना होगा कि इन उपकरणों की सिक्योरिटी के लिए कौन ज़िम्मेदार है, न कि सिर्फ़ यह कि उनकी मरम्मत कौन करता है. इंटरनेट कनेक्टिविटी रोज़मर्रा में इस्तेमाल होने वाली तकनीक को और आसान बना सकती है, लेकिन इसके साथ सुरक्षा भी ज़रूरी है. हैकर्स के अटैक से सिर्फ़ कंप्यूटर ही प्रभावित नहीं होते हैं. एक सेटिंग बदलने से फ़्रीज़र में रखा सामान भी ख़राब हो सकता है."
सिर्फ़ घर ही नहीं, बल्कि बाहर भी इंटरनेट या वाई-फ़ाई तकनीक का इस्तेमाल होता है. इस तकनीक से इंडस्ट्रियल मशीनों और गाड़ियों को दूर से कंट्रोल किया जाता है.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ केन मुनरो ने 2015 के एक प्रदर्शन का ज़िक्र किया. उसमें शोधकर्ताओं ने एक जीप के इंटरनेट से जुड़े एंटरटेनमेंट सिस्टम के ज़रिए उसे दूर से हैक कर लिया था. इसके बाद गाड़ी की सुरक्षा में सुधार किया गया था.
मुनरो ने कहा, "ख़ुशक़िस्मती से ऑटो इंडस्ट्री इस पर ध्यान दे रही है और उसने इस समस्या को ठीक कर दिया है."
मोबाइल कनेक्शन का इस्तेमाल पावर हाउस और वाटर प्लांट की निगरानी के लिए भी बड़े पैमाने पर होता है. इससे इंजीनियर सिस्टम को दूर से कंट्रोल कर पाते हैं.
मुनरो ने कहा कि ब्रिटेन की यूटिलिटी कंपनियाँ आमतौर पर इन कनेक्शनों को सुरक्षित रखने में अच्छी हैं, लेकिन दुनिया भर में सुरक्षा के मानक अलग-अलग हैं.
उनकी सबसे बड़ी चिंता छोटी और कम फ़ंड वाली यूटिलिटी कंपनियों को लेकर थी. वे शायद अब भी पुराने सिस्टम और तकनीक पर निर्भर हैं.
ज़ेडस्केलर के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ ओलिवियर डैलॉय ने कहा, "बिना सही सुरक्षा के इंटरनेट से जुड़ी कोई भी फ़ैक्टरी या उपकरण ऐसे ही ख़तरों का सामना कर सकता है. इसमें कार बनाने वाली कंपनियों से लेकर पावर प्लांट और ट्रैफ़िक व्यवस्था तक शामिल हैं."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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Source: BBC Hindi · शियोना मैक्कलम
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