पिता की मौत के बाद कनाडा ने लौटा बेटा फिर परिवार के तीन सदस्यों ने की 'आत्महत्या', क्या है पूरा मामला?
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प्रकाशित 2 मिनट पहले
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वडोदरा के चार दरवाज़ा इलाक़े में स्थित डाला पटेल पोल में एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने आत्महत्या कर ली है. पोल में स्थित एक बंद घर में मां, उनके छोटे बेटे और बेटी के शव मिले.
वडोदरा में बीबीसी न्यूज़ गुजराती के सहयोगी पत्रकार हार्दिक का कहना है कि 50 वर्षीय आरतीबेन सोनी, उनके 23 वर्षीय बेटे नीलकंठ सोनी और 20 वर्षीय बेटी झलक सोनी को पिछले दो दिनों से घर से बाहर निकलते हुए नहीं देखा गया था.
हार्दिक के अनुसार, घर के आसपास रहने वाले लोगों और रिश्तेदारों को संदेह होने लगा था, क्योंकि घर लगातार अंदर से बंद रहता था.
स्थानीय लोगों ने परिवार के रिश्तेदारों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद बुधवार (28 अक्तूबर) को उन्होंने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी. पुलिस ने अब इस बात की जांच शुरू कर दी है कि परिवार के इन तीन सदस्यों ने ऐसा क़दम क्यों उठाया.
(आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुज़र रहे हैं तो भारत सरकार की 'जीवन आस्था' हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.)
परिवार में क्या घटना घटी?
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एक साल पहले परिवार के मुखिया चेतनभाई सोनी का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था. पिता की मौत के बाद कनाडा में पढ़ाई कर रहे उनके बेटे नीलकंठ भी वडोदरा लौट आए थे.
यह परिवार जूना पादरा रोड पर आयुर्वेदिक दवाओं का कारोबार करता था. लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि आर्थिक रूप से संपन्न माने जाने वाले इस परिवार को इतना बड़ा क़दम उठाना पड़ा?
परिवार के इस क़दम से उनके रिश्तेदार भी सदमे में हैं. परिजनों को अब भी यक़ीन नहीं है कि परिवार ने ऐसा क़दम उठाया है. रिश्तेदारों का कहना है कि चेतनभाई की मौत के बाद परिवार ने बहुत हिम्मत दिखाई थी.
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उनका बेटा कनाडा से लौटा था और परिवार का आयुर्वेदिक दवाओं का कारोबार संभाल रहा था.
परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनमें से कोई आर्थिक परेशानी या किसी दूसरी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा था.
'मैंने दरवाज़ा खोला और जो देखा, मैं दंग रह गया'
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मृतकों के रिश्तेदार और उनके कारोबारी साझेदार केतन शाह कहते हैं, "जब मैं अपनी दुकान से यहां आया तो घर का दरवाज़ा बंद था. मैंने जब फ़ोन किया तो किसी ने नहीं उठाया. जब मैंने दरवाज़ा खोला और जो देखा, उससे मैं दंग रह गया."
केतन शाह कहते हैं, "उनके एक चाचा पास में ही रहते हैं. हमने उन्हें सूचना दी और यहां बुलाया. वह हमारे आयुर्वेदिक अस्पताल में पार्टनर भी हैं. मैं उन्हें 12 साल से जानता हूं."
उन्होंने कहा कि उनके कारोबार में वित्तीय मामलों समेत किसी तरह की कोई समस्या नहीं है.
केतन शाह ने कहा, "इस कारोबार में किया गया निवेश हमारा है. इसे चलाने की ज़िम्मेदारी इस परिवार की थी. लेकिन हमने कभी हिसाब-किताब भी नहीं मांगा."
केतन शाह कहते हैं, "मैं सोने और चांदी का कारोबार करता हूं. हमने इसके लिए भी एक प्राइवेट लिमिटेड फ़र्म बनाई है. मेरा परिवार और इस परिवार के तीन सदस्य, नीलकंठभाई, आरतीबेन और उनकी बेटी जेनी सोनी, इसमें साझेदार हैं."
वडोदरा पुलिस का क्या कहना है?
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घटना की गंभीरता को देखते हुए वडोदरा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, एफ़एसएल की टीम और स्थानीय पुलिसकर्मी मौक़े पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी.
वडोदरा शहर के डीसीपी एंड्रयू मैकवान ने कहा, "जब हम इमारत के अंदर गए, तो तीन लोग मृत पाए गए. ये तीन लोग थे - आरतीबेन सोनी, नीलकंठ और झलक सोनी. इस तरह परिवार के तीनों सदस्यों ने आत्महत्या कर ली."
वडोदरा के एसीबी जीबी बामनिया ने बीबीसी गुजराती को बताया, "पोस्टमॉर्टम की प्रारंभिक रिपोर्ट मिल गई है. उनके घर से एक सुसाइड नोट भी मिला है. सुसाइड नोट में लिखी लिखावट मां, आरती-बेन की है. नोट में लिखा है कि उन्होंने आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या की है."
बमानिया ने कहा, "सुसाइड नोट में 33 लाख रुपये के कर्ज का भी जिक्र है."
"जेनी और नीलकंठ सोनी का लिखा एक सुसाइड नोट भी मिला है. नोट में बताया गया है कि पति की मौत के बाद आरती सोनी डिप्रेशन से जूझ रही थीं. कर्ज की वजह से बच्चे भी तनाव में थे."
आगे की जांच के लिए, पुलिस ने तीनों लोगों के मोबाइल फोन फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेज दिए हैं.
परिजनों ने क्या कहा?
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मृतकों के रिश्तेदार हितेशभाई सोनी का कहना है कि यह घटना उनके लिए बेहद चौंकाने वाली है.
उन्होंने बीबीसी को बताया, "हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसा होगा. यह हमारे लिए बहुत दुखद घटना है. हमें नहीं पता कि वे आर्थिक तंगी से गुज़र रहे थे या नहीं. हमें हाल ही में जानकारी मिली थी कि उन्होंने एक फ़्लैट किराए पर लिया था और वहीं रहने वाले थे. लेकिन हमें नहीं लगता कि इसकी वजह आर्थिक परेशानी है, क्योंकि उनके रिश्तेदार और भाई आर्थिक रूप से संपन्न हैं."
उनका कहना है कि एक साल पहले पिता के निधन के बाद उनके बेटे नीलकंठ कनाडा से वडोदरा लौट आए थे और वहीं बस गए थे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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Source: BBC Hindi · BBC News हिंदी
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