जर्मनी में महंगाई और सरकारी ख़र्चों में कटौती के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे लोग, दुकानों में तोड़फोड़ और लूट

जर्मनी में बढ़ती महंगाई और सरकार की ओर से ख़र्च में कटौती की वजह से लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, जर्मनी में बढ़ती महंगाई और सरकार की ओर से ख़र्च में कटौती की वजह से लोग सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं
    • Author, जेम्स चैटर
  • प्रकाशित 3 मिनट पहले

  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

जर्मनी के शहरों में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की मुश्किलों को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद शनिवार देर रात मध्य फ़्रैंकफर्ट में दंगाइयों ने दुकानों में लूटपाट की.

जर्मनी की आर्थिक राजधानी टैंर के साथ ही बर्लिन, कोलोन और हैम्बर्ग में भी हिंसा की घटनाएं हुईं.

पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने इमरजेंसी सर्विसेज के कर्मचारियों को निशाना बनाकर आतिशबाजी की, पत्थर और बोतलें फेंकीं, जिसके बाद भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया.

इससे पहले दिन में हजारों लोग बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल हुए थे. इन प्रदर्शनों का आयोजन 'जेन ज़ी रेगेल्ट' नाम के अभियान समूह ने किया था, जिसका मतलब है 'जेन ज़ी ने कमान संभाली'.

प्रदर्शनकारी स्कूलों में पर्याप्त फंडिंग न होने, जीवनयापन की बढ़ती लागत, सरकारी ख़र्च में कटौती और सैन्य सेवा के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे.

जर्मनी में यह अशांति फ़्रांस में युवाओं के नेतृत्व में हुए ऐसे ही बड़े प्रदर्शनों के बाद हुई है. यहां शनिवार को 3 लाख 20 हजार से अधिक लोगों ने प्रदर्शन किया.

रात होते-होते ये प्रदर्शन हिंसक हो गए.

जर्मनी के कई शहरों में कई हजार लोगों को प्रदर्शन

जर्मनी में प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, फ़्रैंकफर्ट, म्यूनिख और बर्लिन के अधिकारियों ने बताया कि इन शहरों में कुल मिलाकर क़रीब 18 हजार प्रदर्शनकारी थे

फ्रैंकफर्ट की मुख्य खरीदारी वाली सड़क के एक बड़े हिस्से को पुलिस ने बंद कर दिया. पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि शहर में कई लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.

छोड़कर सबसे अधिक पढ़ी गईं आगे बढ़ें

सबसे अधिक पढ़ी गईं

  • राहुल गांधी

  • राहुल गांधी

  • sambit patra

  • अभिजीत दीपके ने दिलजीत दोसांझ के साथ जारी विवाद को ख़त्म करने की पेशकश की है

समाप्त

फ़्रैंकफर्ट, म्यूनिख और बर्लिन के अधिकारियों ने बताया कि इन शहरों में कुल मिलाकर क़रीब 18 हजार प्रदर्शनकारी थे, जो आयोजकों की वेबसाइट पर बताए गए अनुमान से क़रीब आधे थे.

जर्मन मीडिया के मुताबिक़, शनिवार को जर्मनी के कई शहरों में हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया.

'जेन ज़ी रेगेल्ट' की प्रवक्ता लीना फ्रेडरिख़ ने कहा कि ये प्रदर्शन "युद्ध और जबरदस्ती के बजाय शांति और आज़ादी के लिए लड़ने" के मक़सद से किए गए.

उन्होंने कहा, "हमारे लिए सबसे अहम स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर समर्थन देना है. हम अनिवार्य सैन्य सेवा के ख़िलाफ़ हैं और चाहते हैं कि लोगों पर डाले गए बोझ का ज्यादा निष्पक्ष तरीके से बंटवारा हो."

दुकानों में लूटपाट

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, पुलिस के मुताबिक़, कई दुकानों की खिड़कियां तोड़ दी गईं और लूटपाट की गई

शनिवार रात फ़्रैंकफर्ट पुलिस ने कहा कि शहर के बीचोंबीच "हिंसक दंगे" हो रहे हैं और विशेष पुलिस बलों को तैनात किया गया है.

पुलिस के मुताबिक़, कई दुकानों की खिड़कियां तोड़ दी गईं और आपातकालीन सेवाओं के कर्मचारियों पर मोलोटोव कॉकटेल फेंके गए.

अधिकारियों ने बताया कि एक हथियारों की दुकान की खिड़कियां भी तोड़ दी गईं. एक संदिग्ध को गिरफ़्तार करने के बाद उसके पास से दो हथियार बरामद किए गए हैं.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक़, लोगों ने दूसरी दुकानों में भी घुसकर जूते और अन्य सामान चुरा लिया.

फ़्रैंकफर्ट, हेसे राज्य का सबसे बड़ा शहर है, उसके गृह मंत्री रोमन पोसेक ने कहा कि शहर में हुए प्रदर्शन में "स्पष्ट रूप से पहचाने गए क़रीब 100 ''वामपंथी चरमपंथी" शामिल हो गए थे.

उन्होंने कहा कि जिस तरह इन प्रदर्शनों का अंत हुआ, वह "शर्मनाक" था.

पोसेक ने कहा, "फ्रांस की वे तस्वीरें हम सभी के दिमाग में हैं, जिनमें लूटपाट, घरों में आग, पुलिस वाहनों को जलाना और पुलिस अधिकारियों पर हमले शामिल हैं. इस मामले में फ़्रांस को एक मॉडल के तौर पर पेश नहीं किया जाना चाहिए."

पुलिस ने बताया कि रविवार तड़के तक शहर में स्थिति शांत हो गई.

इमेज स्रोत, Alexander Koerner/Getty Images

इमेज कैप्शन, हैम्बर्ग में प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा की तस्वीर

जर्मनी के दूसरे शहरों में भी ऐसी घटनाएं हुईं. इससे पहले इन शहरों में ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे थे.

कोलोन में पुलिस ने बताया कि मुख्य रेलवे स्टेशन के पास पुलिसकर्मियों पर हमला किया गया. उन पर बोतलें फेंकी गईं और एक साइकिल भी उछालकर मारी गई.

कोलोन के पुलिस प्रमुख जोहानेस हरमान्स ने कहा, "यह बेहद दुखद है कि अपने भविष्य के लिए शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन चाहने वाले युवाओं के बीच ऐसे चरमपंथी घुस आए, जिनका मक़सद सिर्फ हिंसा करना था."

दिन में बड़े प्रदर्शनों के बाद शाम को बर्लिन में एक छोटा प्रदर्शन हुआ. बर्लिन पुलिस के मुताबिक़, इस दौरान 27 पुलिसकर्मी घायल हुए और 56 लोगों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया.

हैम्बर्ग में काले कपड़े पहने लोगों ने आतिशबाजी की और बैरिकेड्स में आग लगा दी. पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनडीआर के मुताबिक़, इस दौरान 120 लोगों को गिरफ़्तार किया गया.

यूरोप के कई देशों में विरोध प्रदर्शन

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, फ़्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह के अंत में देश के अलग-अलग शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए

जर्मनी में ये प्रदर्शन उसी दिन हुए, जिस दिन यूरोप के दूसरे देशों में भी बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे.

फ़्रांस में लगातार तीसरे सप्ताहांत देश के अलग-अलग शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. इनमें तीन लाख 20 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया. ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे.

प्रदर्शनकारी जीवनयापन की बढ़ती लागत और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति, खासकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे थे.

प्रदर्शनों से निपटने के लिए फ़्रांस भर में हजारों पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था. कुछ शहरों में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े.

तूलूज़, लियोन और मार्सेय में झड़पों के बाद 500 से अधिक लोगों को गिरफ़्तार किया गया.

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरां नूनेज़ ने कहा कि मोलोटोव कॉकटेल से एक पुलिस अधिकारी घायल हुआ है. पेरिस पुलिस के मुताबिक़, कई सौ उपद्रवियों ने पुलिस बलों पर चीजें फेंककर हमला किया.

इमेज स्रोत, Reuters

इमेज कैप्शन, यूरोप के कई देशों में ज्यादातर युवा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें फ़्रांस, बेल्जियम, आयरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, सर्बिया और अल्बानिया शामिल हैं

टली में भी प्रदर्शन हुए. रोम और ट्यूरिन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ झड़पें हुईं.

पुर्तगाल में पुलिस ने तंबुओं से बनाए गए एक नए अस्थायी शिविर को हटाने की कार्रवाई की. यह शिविर उन हजारों लोगों के मार्च के बाद बनाया गया था, जिन्होंने किराये से जुड़े एक विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन किया था.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस विधेयक से देश में आवास संकट और बढ़ सकता है.

पुर्तगाल में पिछले एक दशक के दौरान मकानों की कीमतें दोगुने से भी ज्यादा हो चुकी हैं.

हाल के दिनों में यूरोप के कई देशों में ज्यादातर युवा सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें फ़्रांस, बेल्जियम, आयरलैंड, स्पेन, पुर्तगाल, इटली, ग्रीस, सर्बिया और अल्बानिया शामिल हैं.

अलग-अलग देशों में प्रदर्शनकारियों की मांगें भले ही अलग हों, लेकिन उनका मुख्य विरोध रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीजों की बढ़ती लागत पर है.

इनमें किफायती आवास की उपलब्धता, शिक्षा की गुणवत्ता और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती जैसे मुद्दे शामिल हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें

BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह

कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.

Source: BBC Hindi · जेम्स चैटर

At a glance

Topic
World
Country
🇮🇳 IN
Publisher language
HI
Added to Allnira