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- Author, जारोस्लाव लुकीव
- Author, जो टाइडी
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के साइबर संवाददाता
प्रकाशित 6 मिनट पहले
पढ़ने का समय: 7 मिनट
दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज 'बाइनेंस' का कहना है कि उसने एक जटिल हैक में चोरी हुए फंड का क़रीब आधा हिस्सा फ्रीज़ कर दिया है.
इस हैक में 6.3 अरब डॉलर की रक़म तक पहुँच बनाई गई थी. इसे अब तक की सबसे बड़ी चोरी माना जा रहा है.
कंपनी ने कहा कि उसकी तीन अरब डॉलर की चोरी हुई डिजिटल संपत्ति सुरक्षित कर ली गई है, लेकिन बड़ी रक़म अब भी अज्ञात हैकर्स के हाथों में है.
शुरुआत में कंपनी को लगा था कि एक इंजीनियर के लैपटॉप से छेड़छाड़ की गई थी, जिसकी वजह से बिना अनुमति के पैसे निकाले जा सके. हालांकि, बाद में कंपनी ने कहा कि हमला इससे कहीं बड़ा था.
कई एनालिटिक्स कंपनियों ने इस हैक को उत्तर कोरिया की एक हैकिंग यूनिट से जोड़ा है. यह हमला साल 2025 में बायबिट एक्सचेंज पर हुई 1.5 अरब डॉलर की चोरी से भी बड़ा है.
अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने कहा कि वह चोरी हुए फंड की पहचान करने, उन्हें फ्रीज़ करने, उनका पता लगाने और वापस हासिल करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रही है.
बाइनेंस ने क्या बताया
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वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली अमेरिका की प्रमुख फेडरल एजेंसी एफ़बीआई ने कहा कि वह साइबर अपराधियों की पहचान कर उन्हें न्याय के कटघरे में लाएगी.
वहीं, बाइनेंस ने भी कहा कि वह एफ़बीआई के साथ मिलकर काम कर रही है.
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बाइनेंस ने कहा कि उसका अमेरिकी एक्सचेंज इस हमले से प्रभावित नहीं हुआ है. हालांकि, अमेरिका के पास अब भी इस हैक की जांच करने और चोरी हुए फंड का पता लगाने में मदद करने का अधिकार क्षेत्र होगा.
इस तरह की कोशिशों में आमतौर पर दुनियाभर की क़ानून प्रवर्तन एजेंसियां शामिल होती हैं.
इस हैक में अमेरिका से जुड़े कुछ एसेट भी शामिल थे. इनमें टेदर और सर्कल जैसी स्टेबलकॉइन शामिल हैं. ये ऐसी क्रिप्टोकरेंसी हैं, जिनकी क़ीमत डॉलर से जुड़ी होती है.
बाइनेंस ने अपने यूज़र्स से कहा, "आपका पैसा सुरक्षित है और हम हर नुक़सान की भरपाई कर रहे हैं."
कंपनी ने शुरुआत में सभी डिपॉजिट और निकासी पर रोक लगा दी थी. हालांकि, बाद में एक अपडेट में कहा कि "डिपॉजिट पर कोई असर नहीं पड़ा है."
बाइनेंस के को-सीईओ रिचर्ड टेंग ने कहा, "यह हमला किसी एक व्यक्ति ने नहीं किया था. हमारी शुरुआती जांच में पता चला था कि इस सुरक्षा घटना में एक लैपटॉप से छेड़छाड़ की गई हो सकती है. हालांकि, बाद की जांच में हमें सेंधमारी के कुछ और तरीक़े भी पता चले हैं."
टेंग ने यह भी बताया कि हैकर्स ने एक ऐसे तरीक़े का इस्तेमाल किया, जिससे उनके टूल्स और हमले के निशान ख़ुद ही नष्ट हो जाते थे. इससे कंपनी के लिए हमले का पता लगाना और उसकी जांच करना मुश्किल हो गया.
शुरुआत में कंपनी ने कहा था कि यह सेंधमारी किसी डेवलपमेंट एंड ऑपरेशन्स इंजीनियर के लैपटॉप से छेड़छाड़ के बाद शुरू हुई हो सकती है. हालांकि, बाद के बयानों में कंपनी ने हमले का दायरा इससे कहीं बड़ा बताया.
क्या हो पाएगी नुक़सान की भरपाई
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बाद के एक अपडेट में कंपनी ने कहा कि उसने चोरी हुई संपत्ति की भरपाई के लिए अपने 6.34 अरब डॉलर से ज़्यादा के फंड अलग रखे हैं. साथ ही, वह कई तरह के क्रिप्टो टोकन भी ख़रीद रही है.
शुक्रवार को बाइनेंस हैक की ख़बर से क्रिप्टोकरेंसी बाज़ार में चिंता बढ़ गई. न्यूयॉर्क में शुक्रवार दोपहर कारोबार के दौरान बिटकॉइन की क़ीमत पाँच फ़ीसदी गिरकर 76,800 डॉलर पर आ गई.
क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कॉइनबेस के शेयरों में 12 फ़ीसदी की गिरावट आई. निवेशकों ने कंपनी के तिमाही नतीजों पर भी प्रतिक्रिया दी.
कंपनी का राजस्व उम्मीद से थोड़ा कम रहा था. क्रिप्टोकरेंसी में कारोबार करने वाली वित्तीय सेवा कंपनी रॉबिनहुड के शेयर भी 7.8 फ़ीसदी गिर गए.
2017 में चीन में स्थापित बाइनेंस यूज़र्स को डिजिटल एसेट में कारोबार करने की सुविधा देता है. अनुमान है कि दुनियाभर में इसके 30 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड यूज़र्स हैं.
कंपनी ने 2024 में कहा था कि उसके पास 160 अरब डॉलर से ज़्यादा की संपत्ति कस्टडी में है.
फ़िलहाल बाइनेंस के यूज़र्स और पूरी क्रिप्टो इंडस्ट्री के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि क्या कंपनी इतने बड़े वित्तीय नुक़सान की भरपाई कर पाएगी.
कंपनी ने बार-बार कहा है कि ग्राहकों का पैसा सुरक्षित रहेगा और वह इस संकट से निपटने के लिए आर्थिक रूप से मज़बूत है.
हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी के इतिहास पर नज़र रखने वाले लोग ऑनलाइन यह याद दिला रहे हैं कि साल 2022 में एफ़टीएक्स एक्सचेंज के दिवालिया होने से पहले उसके सीईओ सैम बैंकमैन-फ्राइड ने भी इसी तरह के दावे किए थे.
बाद में एक्सचेंज के ढहने से ग्राहकों और पूरी इंडस्ट्री को भारी नुक़सान हुआ था.
उत्तर कोरिया पर आरोप
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कई विशेषज्ञों ने ग्राहकों को चेतावनी दी है कि वे नुकसान की भरपाई करने के बाइनेंस के वादे को क़ानूनी रूप से बाध्यकारी न मानें. उनका कहना है कि नुक़सान वापस पाने के लिए ग्राहकों को क़ानूनी कार्रवाई भी करनी पड़ सकती है.
लंदन की एडविन कोए लॉ फर्म के डैनियल टंकेल ने कहा कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ग्राहकों से उनके कॉन्ट्रैक्ट में क्या वादे किए गए हैं और ज़रूरत पड़ने पर सेवाओं में कमी के लिए बाइनेंस के ख़िलाफ़ कहाँ मुक़दमा किया जा सकता है.
बाइनेंस दुनिया भर में नियामक एजेंसियों की जांच के दायरे में रहा है.
इस बीच एआई आधारित जांच करने वाली कंपनी टीआरएम लैब्स ने कहा कि इस हमले के कई पहलू उत्तर कोरिया से जुड़े पहले के साइबर हमलों से मिलते-जुलते हैं. इनमें बायबिट पर हुआ हैक भी शामिल है.
पिछले पांच साल में क्रिप्टो इंडस्ट्री को हैकर्स की वजह से भारी नुक़सान हुआ है.
लगभग सभी मामलों में जांचकर्ताओं ने उत्तर कोरिया के हैकर्स को ज़िम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने कुख्यात लाजरस ग्रुप की ओर इशारा किया है, जिसे ट्रेडरट्रेटर के नाम से भी जाना जाता है. ये नाम उन साइबर अपराधियों के समूहों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जिन पर उत्तर कोरियाई शासन के लिए सीधे काम करने का आरोप है.
क्रिप्टो एनालिटिक्स कंपनी चेनालिसिस ने कहा कि उसे इस बात का पूरा भरोसा है कि इस हैक का संबंध उत्तर कोरिया के किसी व्यक्ति से है.
उत्तर कोरिया एक ग़रीब देश है, जहाँ उद्योग बहुत कम हैं और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध काफ़ी सख़्त हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि वहाँ का शासन देश में पैसा लाने के लिए साइबर अपराधों का इस्तेमाल करता है.
उत्तर कोरिया हमेशा इन आरोपों से इनकार करता रहा है. हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी के लेनदेन के विश्लेषण और देश छोड़ चुके लोगों के इंटरव्यू से मिले सबूत काफ़ी मज़बूत हैं.
इससे उत्तर कोरिया के दुनिया का ऐसा इकलौता देश होने की संभावना जताई जाती है, जो सरकारी ख़ज़ाने के लिए पैसा जुटाने के तरीक़े के रूप में हैकिंग का इस्तेमाल करता है.
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Source: BBC Hindi · जारोस्लाव लुकीव, जो टाइडी
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