अमेरिकी सीनेट के लिए जीतने वाले अब्दुल अल-सैयद का भारत से है ये पारिवारिक रिश्ता

अल -सैयद

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इमेज कैप्शन, मिशिगन से सीनेट के लिए जीत हासिल करने के बाद लोगों का अभिवादन करते हुए अब्दुल अल-सैयद, साथ में उनकी पत्नी डॉक्टर सारा जुकाकू
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़ हिन्दी के लिए
  • प्रकाशित 3 मिनट पहले

  • पढ़ने का समय: 7 मिनट

अमेरिकी राज्य मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज करने वाले अब्दुल अल-सैयद का भारत के कर्नाटक के तटीय इलाक़े से ख़ास पारिवारिक रिश्ता है.

उनकी पत्नी डॉक्टर सारा जुकाकू के दादा जुकाकू शमशुद्दीन वह शख़्स थे, जिन्होंने उत्तर कन्नड़ ज़िले के भटकल में बिजली पहुंचाई थी.

वह इस इलाक़े के पहले वकील भी थे. बाद में वह मुख्यमंत्री बीडी जत्ती (1958-1962) की सरकार में उपमंत्री बने.

डॉक्टर सारा जुकाकू के एक अन्य रिश्तेदार एसएम याह्या भी वकील थे. बाद में वह मुख्यमंत्री देवराज उर्स (1972-1977 और 1978-1980) के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री बने. उन्होंने इस इलाक़े में शिक्षा को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई.

पेशे से डॉक्टर अल-सैयद अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं. उन्हें इन चुनावों में 50 फ़ीसदी से ज़्यादा वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोज़र्स को क़रीब 45 फ़ीसदी वोट मिले.

डॉक्टर अल-सैयद ने इससे पहले कभी कोई राजनीतिक पद नहीं संभाला है.

इन चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा है. ताज़ा नतीजों के मुताबिक़, अमेरिकी संसद के उच्च सदन सीनेट में अब डेमोक्रेटिक पार्टी के 54 और रिपब्लिकन पार्टी के 44 सदस्य हैं.

वहीं, अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी के 228 और रिपब्लिकन पार्टी के महज़ 139 सदस्य हैं. इस सदन में बहुमत का आंकड़ा 218 है और अब भी 68 सीटों के नतीजे आने बाक़ी हैं. यानी दोनों ही सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है.

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'अरब होने से ज़्यादा भारतीय हूं'

अल-सैयद ने कर्नाटक में अपनी पत्नी के नाम एक संपत्ति होने की घोषणा भी की है

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चुनाव प्रक्रिया के दौरान अपने ख़िलाफ़ चलाए गए अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए अल-सैयद ने कहा, "सुनिए, मेरी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुई है. इस शादी को 20 साल हो चुके हैं. अब तो मैं इस परिवार में पूरी तरह घुल-मिल गया हूं. आपको शायद नहीं पता होगा कि हो सकता है मैं अरब होने से ज़्यादा भारतीय हूं."

रिश्ते में डॉक्टर सारा की बुआ, भटकल की रहने वालीं और पेशे से बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आलिया नाज़नीन जुकाकू ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी को बताया, "हम बहुत ख़ुश हैं और हमें इस पर गर्व है. अल-सैयद कुछ साल पहले भटकल और बेंगलुरु आए थे."

उन्होंने कहा, "वह बहुत हंसमुख, मिलनसार और मददगार इंसान हैं. उनके साथ समय बिताना अच्छा लगता है. वह हमारी भटकल की भाषा के कुछ शब्द बोल लेते हैं. डॉक्टर सारा का परिवार अंग्रेज़ी में बातचीत करता है."

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इमेज कैप्शन, डॉक्टर सारा के पिता डॉक्टर तैयब मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका चले गए

डॉक्टर आलिया के भाई डॉक्टर तैयब जुकाकू हैं जो अब्दुल अल सैयद की पत्नी डॉक्टर सारा के पिता हैं. मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर तैयब अमेरिका चले गए थे.

डॉक्टर सारा का जन्म और पालन-पोषण अमेरिका में हुआ.

डॉक्टर आलिया, शमशुद्दीन की सबसे छोटी बेटी हैं. शमशुद्दीन का 1964 में महज़ 51 साल की उम्र में निधन हो गया था.

मिशिगन यूनिवर्सिटी में पहली मुलाक़ात

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इमेज कैप्शन, अब्दुल अल-सैयद ने अपनी जीत का क्रेडिट अपनी पत्नी डॉक्टर सारा को भी दिया

डॉक्टर सारा और अल-सैयद की मुलाक़ात मिशिगन यूनिवर्सिटी में हुई थी. दोनों रोड्स स्कॉलर थे.

अल-सैयद ने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई की और महामारी विज्ञान में विशेषज्ञता हासिल की.

साल 2015 में डेट्रॉइट स्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी निदेशक के तौर पर उनकी नियुक्ति ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरीं.

डॉक्टर सारा के एक चचेरे भाई ने बताया, "सैयद के भारत आने की वजह यह थी कि मेरे मामा डॉक्टर तैयब लगभग हर साल पूरे परिवार को पारिवारिक मिलन समारोह के लिए एक साथ इकट्ठा करते थे."

उन्होंने इस रिपोर्ट में अपना नाम प्रकाशित नहीं करने की इच्छा जताई.

डॉक्टर आलिया ने कहा, "सैयद बहुत प्रतिभाशाली व्यक्ति हैं और सभी लोगों की स्थिति बेहतर बनाने के लिए समर्पित हैं. वह एलजीबीटीक्यू समुदाय समेत सभी के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं. मूल रूप से वह मानवता के लिए काम कर रहे हैं."

उन्होंने आगे कहा, "मेरे पिता (शमशुद्दीन) का भटकल में बहुत नाम है. हमें उनकी विरासत पर गर्व है. उम्मीद है कि वह (सैयद) मेरे पिता की विरासत को आगे बढ़ाएंगे."

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डॉक्टर आलिया ने याद करते हुए बताया कि उनके पिता बेहद ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते थे.

उन्होंने कहा, "वह दिन में केवल एक बार खाना खाकर गुज़ारा करते थे और अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए एक होटल में वेटर का काम करते थे. मेरे नाना एमएम सिद्दीक़ी ने उन्हें क़ानून की पढ़ाई पूरी करने में मदद की और उनकी शादी करवाई."

डॉक्टर आलिया ने बताया, "मुख्यमंत्री जत्ती की सरकार में पांच साल तक उपमंत्री के रूप में सेवा देने के बाद जब उनका निधन हुआ, तो मेरी मां ने हमें बताया था कि वह अपने पीछे 25 रुपये भी नहीं छोड़ गए थे. मेरी मां को 10 बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ा."

डॉक्टर सारा के एक चचेरे भाई ने कहा, "मेरे दादा और अल-सैयद के व्यक्तित्व में कई समानताएं हैं. वह ईमानदार, स्पष्टवादी और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. मेरे एक अन्य मामा एसएम याह्या भी ऐसे ही थे, जिन्होंने देवराज उर्स की सरकार में मंत्री के रूप में कर्नाटक की सेवा की थी."

याह्या सरकार में एक ईमानदार और भ्रष्टाचार-मुक्त मंत्री के तौर पर जाने जाते थे.

भारत से अमेरिका तक फ़ैला है परिवार

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इमेज कैप्शन, मिशिगन में अब्दुल अल-सैयद के उत्साहित समर्थक

शमशुद्दीन का परिवार भटकल, बेंगलुरु और अमेरिका में फैला हुआ है. परिवार के ज़्यादातर सदस्य डॉक्टर या इंजीनियर हैं.

डॉक्टर आलिया ने कहा, "मैंने और मेरे पति ने, जो स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं, विदेश में काम किया है. लेकिन हम अपने पारिवारिक मूल से जुड़ने के लिए वापस लौट आए हैं. भटकल में डॉक्टरों की संख्या कम है, जबकि दूसरी जगहों पर वे आसानी से मिल जाते हैं."

डॉक्टर सारा के नाना एमएम सिद्दीक़ी ने भटकल में अंजुमन हमी-ए-मुस्लिमीन की स्थापना की थी.

यह संस्था नर्सरी स्कूल से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज तक के शैक्षणिक संस्थान चलाती है. शमशुद्दीन ने समाज के सभी वर्गों पर ध्यान देते हुए अंजुमन के काम को आगे बढ़ाया.

अल-सैयद ने अपनी वित्तीय जानकारी घोषित करते हुए बताया है कि डॉक्टर सारा के नाम बेंगलुरु में एक संपत्ति है, जिसे किराये पर दिया गया है.

चुनाव प्रचार के आख़िरी दिनों में स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जब उनकी डेमोक्रेटिक पार्टी की सहयोगी हेली स्टीवंस ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोज़र्स का समर्थन करने की घोषणा कर दी. हेली स्टीवंस को डॉक्टर अल-सैयद ने पार्टी के नामांकन की दौड़ में मामूली अंतर से हराया था.

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा समेत कई उदारवादी डेमोक्रेटिक नेताओं ने भी उनके अभियान का समर्थन किया था.

अल-सैयद ने वामपंथी मंच से चुनाव प्रचार किया. उनके प्रमुख मुद्दों में इसराइल को अमेरिकी सैन्य सहायता की आलोचना और अरबपतियों पर टैक्स लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन जुटाना शामिल था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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Source: BBC Hindi · इमरान क़ुरैशी

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